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जब हम रात के शांत आकाश की ओर देखते हैं और हजारों चमकते तारों को देखते हैं, तो मन में एक सवाल जरूर आता है — यह सब कहाँ तक फैला हुआ है? क्या अंतरिक्ष वास्तव में खाली है? और अगर खाली है, तो फिर तारे, ग्रह और आकाशगंगाएँ कहाँ से आईं?
यही वह जगह है जहाँ Space (अंतरिक्ष) और Vacuum (निर्वात) की वैज्ञानिक अवधारणाएँ सामने आती हैं।
अंतरिक्ष वह विशाल क्षेत्र है जो पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर फैला हुआ है और जिसमें ग्रह, तारे, आकाशगंगाएँ, धूल, गैस और ऊर्जा मौजूद होती हैं। लेकिन इस विशाल ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा लगभग खाली होता है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में Vacuum कहा जाता है।
यह विषय केवल खगोल विज्ञान (Astronomy) का हिस्सा ही नहीं है, बल्कि आधुनिक विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक, रॉकेट इंजीनियरिंग और ब्रह्मांड विज्ञान (Cosmology) की नींव भी है।
इस Ultimate Guide में हम विस्तार से समझेंगे:

Space, जिसे हिंदी में अंतरिक्ष कहा जाता है, वह विशाल क्षेत्र है जो पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर मौजूद है और जिसमें सभी खगोलीय पिंड जैसे ग्रह, तारे, धूमकेतु, उल्काएँ, गैस और धूल मौजूद होती हैं।
सरल शब्दों में:
Space = पृथ्वी के वातावरण के बाहर का विशाल ब्रह्मांड
यह क्षेत्र इतना विशाल है कि इसकी वास्तविक सीमा आज तक वैज्ञानिक भी पूरी तरह नहीं जान पाए हैं।
हमारी पृथ्वी, हमारा सौरमंडल और हमारी आकाशगंगा — यह सब इसी विशाल अंतरिक्ष का हिस्सा हैं।
पृथ्वी के चारों ओर गैसों की एक परत मौजूद है जिसे वायुमंडल (Atmosphere) कहा जाता है।
यह वायुमंडल धीरे-धीरे पतला होता जाता है और अंततः समाप्त हो जाता है। वैज्ञानिकों ने इस सीमा को निर्धारित करने के लिए एक काल्पनिक रेखा बनाई है जिसे Kármán Line कहा जाता है।
Kármán Line पृथ्वी की सतह से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर स्थित एक सीमा है जिसे अंतरिक्ष की शुरुआत माना जाता है।
इस सीमा के ऊपर:
यही कारण है कि जब कोई रॉकेट इस सीमा को पार करता है तो उसे Spaceflight कहा जाता है।


अंतरिक्ष की विशालता को समझना इंसानी दिमाग के लिए बेहद कठिन है। हम जिस ब्रह्मांड में रहते हैं वह इतना विशाल है कि उसकी तुलना में हमारी पृथ्वी एक छोटे कण की तरह प्रतीत होती है। खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड का आकार इतना बड़ा है कि हम उसका केवल एक छोटा सा हिस्सा ही देख और समझ पाए हैं, जिसे Observable Universe कहा जाता है।
अंतरिक्ष की विशालता को समझने के लिए हमें छोटे स्तर से बड़े स्तर तक तुलना करके देखना पड़ता है।
हमारी पृथ्वी हमें बहुत बड़ी लगती है, लेकिन जब इसकी तुलना सूर्य से की जाती है तो यह बहुत छोटी दिखाई देती है।
इसका अर्थ है कि सूर्य का व्यास पृथ्वी से लगभग 109 गुना बड़ा है। इतना ही नहीं, सूर्य के अंदर लगभग 13 लाख पृथ्वियाँ समा सकती हैं।
फिर भी सूर्य ब्रह्मांड के सबसे बड़े तारों में से नहीं है। ब्रह्मांड में ऐसे तारे भी मौजूद हैं जो सूर्य से सैकड़ों गुना बड़े हैं।
हमारा Solar System (सौरमंडल) सूर्य और उसके चारों ओर घूमने वाले ग्रहों, उपग्रहों, क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं से मिलकर बना है।
सौरमंडल में सूर्य से सबसे दूर ग्रह नेपच्यून है, जो लगभग 4.5 अरब किलोमीटर दूर स्थित है।
अगर हम प्रकाश की गति से भी यात्रा करें तो:
यह दूरी दिखाती है कि केवल हमारा सौरमंडल ही कितना विशाल है।
हमारा सौरमंडल जिस आकाशगंगा में स्थित है उसे Milky Way Galaxy कहा जाता है।
इस आकाशगंगा में:
यदि कोई व्यक्ति प्रकाश की गति से भी यात्रा करे तो हमारी आकाशगंगा को पार करने में लगभग 1 लाख वर्ष लगेंगे।
हमारा सूर्य Milky Way के केंद्र से लगभग 26,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।
पहले वैज्ञानिकों को लगता था कि ब्रह्मांड में लगभग 100 अरब आकाशगंगाएँ हैं। लेकिन आधुनिक दूरबीनों और अंतरिक्ष मिशनों से पता चला है कि यह संख्या इससे भी कहीं अधिक हो सकती है।
नए शोध के अनुसार:
👉 ब्रह्मांड में लगभग 2 ट्रिलियन (2,000 अरब) आकाशगंगाएँ हो सकती हैं।
हर आकाशगंगा में अरबों तारे होते हैं, और हर तारे के आसपास ग्रह हो सकते हैं। इसका मतलब यह है कि ब्रह्मांड में ग्रहों और तारों की संख्या लगभग अकल्पनीय है।
हम जिस ब्रह्मांड को देख सकते हैं उसे Observable Universe कहा जाता है।
इसका व्यास लगभग:
93 अरब प्रकाश वर्ष
माना जाता है।
यह दूरी इतनी विशाल है कि यदि प्रकाश की गति से भी यात्रा की जाए तो ब्रह्मांड के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुँचने में अरबों वर्ष लग सकते हैं।
ब्रह्मांड केवल तारों और ग्रहों से ही नहीं बना है। इसमें कई अन्य संरचनाएँ भी मौजूद हैं:
ये सभी मिलकर ब्रह्मांड की विशाल संरचना बनाते हैं।
मानव मस्तिष्क को रोजमर्रा की दूरी और आकार समझने की आदत होती है — जैसे किलोमीटर या शहरों की दूरी।
लेकिन अंतरिक्ष में दूरी को मापने के लिए प्रकाश वर्ष (Light Year) का उपयोग किया जाता है।
1 प्रकाश वर्ष = 9.46 ट्रिलियन किलोमीटर
जब दूरी इतनी विशाल हो जाती है, तो उसे समझना हमारे लिए लगभग असंभव हो जाता है।
अंतरिक्ष की विशालता इतनी अधिक है कि हमारी पृथ्वी, हमारा सौरमंडल और यहाँ तक कि हमारी आकाशगंगा भी ब्रह्मांड का केवल एक छोटा सा हिस्सा है।
इसीलिए वैज्ञानिक कहते हैं कि ब्रह्मांड की विशालता को पूरी तरह समझना अभी भी मानवता के लिए एक बड़ी चुनौती है।




बहुत से लोग सोचते हैं कि अंतरिक्ष पूरी तरह खाली है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। अंतरिक्ष में कई प्रकार की खगोलीय वस्तुएँ और संरचनाएँ मौजूद होती हैं। इनमें तारे, ग्रह, आकाशगंगाएँ, गैस के बादल, ब्लैक होल, धूमकेतु और कई अन्य अद्भुत वस्तुएँ शामिल हैं।
ये सभी मिलकर ब्रह्मांड की संरचना बनाते हैं और अंतरिक्ष को गतिशील तथा रहस्यमय बनाते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि अंतरिक्ष में कौन-कौन सी प्रमुख चीजें मौजूद होती हैं।



तारे ब्रह्मांड की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय वस्तुओं में से एक हैं। ये विशाल गैस के गोले होते हैं जो अपने अंदर होने वाली न्यूक्लियर फ्यूजन (Nuclear Fusion) प्रक्रिया के कारण ऊर्जा और प्रकाश उत्पन्न करते हैं।
तारों के अंदर मुख्य रूप से दो गैसें होती हैं:
तारों के केंद्र में अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण हाइड्रोजन परमाणु आपस में मिलकर हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है, जो प्रकाश और गर्मी के रूप में अंतरिक्ष में फैलती है।
हमारा सूर्य (Sun) भी एक तारा है और यही पृथ्वी पर जीवन के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
तारों के कई प्रकार होते हैं:
ब्रह्मांड में अरबों-खरबों तारे मौजूद हैं, और हर तारा एक संभावित ग्रह प्रणाली का केंद्र हो सकता है।


ग्रह वे खगोलीय पिंड होते हैं जो किसी तारे के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में घूमते हैं। ग्रह स्वयं प्रकाश उत्पन्न नहीं करते बल्कि अपने तारे के प्रकाश को परावर्तित करते हैं।
हमारे सौरमंडल (Solar System) में कुल 8 ग्रह हैं:
इन ग्रहों में आकार, संरचना और वातावरण के अनुसार काफी अंतर होता है।
उदाहरण के लिए:
इन सभी ग्रहों में से केवल पृथ्वी पर ही जीवन पाया जाता है, क्योंकि यहाँ पानी, ऑक्सीजन और अनुकूल तापमान मौजूद है।

आकाशगंगा तारों, ग्रहों, गैस, धूल और डार्क मैटर का विशाल समूह होती है। यह गुरुत्वाकर्षण के कारण एक साथ बंधी रहती है।
हमारी आकाशगंगा का नाम है:
Milky Way Galaxy
इस आकाशगंगा में:
मौजूद हैं।
हमारा सौरमंडल Milky Way के एक छोटे से हिस्से में स्थित है।
ब्रह्मांड में कई प्रकार की आकाशगंगाएँ होती हैं:
Milky Way एक Spiral Galaxy है।

Nebula अंतरिक्ष में मौजूद गैस और धूल के विशाल बादल होते हैं। ये ब्रह्मांड के सबसे सुंदर और रंगीन खगोलीय दृश्यों में से एक होते हैं।
Nebula को अक्सर Stellar Nurseries कहा जाता है, क्योंकि यहीं नए तारे जन्म लेते हैं।
जब गैस और धूल के बादल गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ने लगते हैं, तब उनका केंद्र गर्म और घना हो जाता है और धीरे-धीरे एक नया तारा बनता है।
कुछ प्रसिद्ध Nebula हैं:
इनमें से Eagle Nebula की प्रसिद्ध संरचना को Pillars of Creation कहा जाता है।


Black Hole ब्रह्मांड की सबसे रहस्यमय और शक्तिशाली वस्तुओं में से एक है।
यह अंतरिक्ष का वह क्षेत्र होता है जहाँ गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि:
👉 प्रकाश भी उससे बाहर नहीं निकल सकता।
Black holes आमतौर पर तब बनते हैं जब कोई विशाल तारा अपने जीवन के अंत में सुपरनोवा विस्फोट के बाद collapse हो जाता है।
Black holes के मुख्य भाग होते हैं:
कई आकाशगंगाओं के केंद्र में Supermassive Black Holes पाए जाते हैं।
हमारी आकाशगंगा Milky Way के केंद्र में भी एक विशाल Black Hole मौजूद है जिसे Sagittarius A* कहा जाता है।
इनके अलावा अंतरिक्ष में कई अन्य चीजें भी मौजूद होती हैं:
बर्फ, गैस और धूल से बने छोटे पिंड जो सूर्य के पास आने पर चमकने लगते हैं।
जब छोटे पत्थर पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते हैं तो वे जलने लगते हैं और हमें टूटते तारे की तरह दिखाई देते हैं।
ये छोटे चट्टानी पिंड होते हैं जो मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित Asteroid Belt में पाए जाते हैं।
Vacuum ऐसी स्थिति होती है जहाँ पदार्थ की मात्रा अत्यंत कम होती है।
सरल शब्दों में:
Vacuum = ऐसा स्थान जहाँ हवा या कण लगभग नहीं होते।
हालाँकि पूर्ण Vacuum बनाना लगभग असंभव है।
इसलिए वैज्ञानिक अक्सर Near Perfect Vacuum शब्द का उपयोग करते हैं।


अक्सर लोग यह सोचते हैं कि अंतरिक्ष पूरी तरह खाली है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह सही नहीं है। अंतरिक्ष में पदार्थ की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन फिर भी यह पूरी तरह खाली नहीं होता।
वास्तव में अंतरिक्ष में बहुत कम घनत्व (density) में कुछ कण और ऊर्जा मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक अंतरिक्ष को Perfect Vacuum नहीं बल्कि Near Perfect Vacuum कहते हैं।
अर्थात् अंतरिक्ष लगभग खाली है, लेकिन पूरी तरह शून्य नहीं है।
अंतरिक्ष में निम्न चीजें मौजूद होती हैं:
इन सभी की मात्रा इतनी कम होती है कि एक घन सेंटीमीटर अंतरिक्ष में केवल कुछ ही परमाणु पाए जाते हैं।
वैज्ञानिक प्रयोगों और भौतिकी में Vacuum को उसके दबाव (pressure) के आधार पर कई स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है। अलग-अलग तकनीकी और वैज्ञानिक प्रयोगों में अलग-अलग प्रकार के Vacuum का उपयोग किया जाता है।
Low Vacuum वह स्थिति होती है जहाँ दबाव सामान्य वायुमंडलीय दबाव से कम होता है लेकिन अभी भी गैस के कण मौजूद रहते हैं।
यह अक्सर साधारण मशीनों और औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग किया जाता है।
उदाहरण:
Medium Vacuum में गैस के कण और भी कम हो जाते हैं और दबाव काफी कम हो जाता है।
इस प्रकार का Vacuum वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगों में उपयोग किया जाता है।
High Vacuum
High Vacuum में गैस की मात्रा बहुत कम हो जाती है और दबाव बहुत कम स्तर पर पहुँच जाता है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से:
में किया जाता है।
Ultra High Vacuum वह स्थिति होती है जहाँ पदार्थ की मात्रा अत्यंत कम होती है।
यह स्थिति लगभग अंतरिक्ष जैसी होती है।
अंतरिक्ष को अक्सर Ultra High Vacuum के समान माना जाता है क्योंकि वहाँ दबाव अत्यंत कम होता है।
अंतरिक्ष में Vacuum बनने का मुख्य कारण है ब्रह्मांड में पदार्थ का असमान वितरण।
वैज्ञानिकों के अनुसार लगभग 13.8 अरब वर्ष पहले Big Bang नामक घटना के साथ ब्रह्मांड की शुरुआत हुई।
Big Bang के बाद:
कुछ क्षेत्रों में पदार्थ अधिक मात्रा में इकट्ठा हो गया और वहाँ गुरुत्वाकर्षण के कारण खगोलीय संरचनाएँ बनने लगीं।
इसी प्रक्रिया से बने:
लेकिन इन संरचनाओं के बीच बहुत बड़े क्षेत्र ऐसे रह गए जहाँ पदार्थ बहुत कम मात्रा में मौजूद है।
इन्हीं क्षेत्रों को हम Cosmic Voids या लगभग खाली अंतरिक्ष कहते हैं।
यही कारण है कि ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा Vacuum से भरा हुआ है।
अंतरिक्ष के कई ऐसे भौतिक गुण हैं जो पृथ्वी के वातावरण से बिल्कुल अलग हैं। इन गुणों को समझना अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पृथ्वी की सतह पर वायुमंडलीय दबाव लगभग:
101,325 Pascal
होता है।
लेकिन अंतरिक्ष में यह दबाव अत्यंत कम होता है। कई स्थानों पर यह लगभग:
10⁻¹⁷ Pascal
तक हो सकता है।
यह पृथ्वी के वायुमंडलीय दबाव से अरबों गुना कम है।
इसी कारण अंतरिक्ष में वस्तुएँ और गैसें पृथ्वी की तरह व्यवहार नहीं करतीं।
ध्वनि तरंगों को फैलने के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता होती है।
यह माध्यम हो सकता है:
पृथ्वी पर ध्वनि इसलिए सुनाई देती है क्योंकि हवा ध्वनि तरंगों को आगे बढ़ाती है।
लेकिन अंतरिक्ष में हवा नहीं होती।
इसलिए:
Space में sound travel नहीं कर सकता
यही कारण है कि यदि अंतरिक्ष में कोई विस्फोट भी हो जाए तो उसकी आवाज सुनाई नहीं देगी।
अंतरिक्ष का औसत तापमान लगभग:
−270°C
माना जाता है।
यह तापमान Absolute Zero (−273°C) के बहुत करीब है।
लेकिन अंतरिक्ष का तापमान स्थिर नहीं होता।
उदाहरण के लिए:
इसी कारण अंतरिक्ष यानों को विशेष तापीय सुरक्षा (thermal protection) दी जाती है।
पृथ्वी के वातावरण और चुंबकीय क्षेत्र हमें कई प्रकार के खतरनाक विकिरणों से बचाते हैं।
लेकिन अंतरिक्ष में ऐसी सुरक्षा नहीं होती।
अंतरिक्ष में कई प्रकार के विकिरण मौजूद होते हैं:
इसी कारण अंतरिक्ष यात्रियों को विशेष spacesuits और radiation shields की आवश्यकता होती है।
हालाँकि अंतरिक्ष हमें खाली दिखाई देता है, लेकिन यह पूरी तरह खाली नहीं है।
इसमें बहुत कम मात्रा में गैस, धूल, ऊर्जा और विकिरण मौजूद होते हैं। इसलिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष को Near Perfect Vacuum कहते हैं।
अंतरिक्ष का कम दबाव, अत्यधिक विकिरण, और अत्यंत कम तापमान इसे पृथ्वी से बिल्कुल अलग वातावरण बनाते हैं।
इन सभी विशेषताओं को समझना अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


अंतरिक्ष का वातावरण पृथ्वी के वातावरण से पूरी तरह अलग होता है। पृथ्वी पर जीवन संभव है क्योंकि यहाँ वायुमंडल, ऑक्सीजन, उपयुक्त दबाव और तापमान मौजूद हैं। लेकिन अंतरिक्ष में इन सभी चीजों की कमी होती है।
यदि कोई इंसान बिना spacesuit के अंतरिक्ष में पहुँच जाए, तो उसके शरीर पर कई गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। अंतरिक्ष का कम दबाव, ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक विकिरण मानव शरीर के लिए अत्यंत खतरनाक होते हैं।
आइए समझते हैं कि अंतरिक्ष में इंसान के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते हैं।
पृथ्वी पर हम सांस लेने के लिए वायुमंडल से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं। लेकिन अंतरिक्ष में हवा मौजूद नहीं होती।
यदि कोई व्यक्ति बिना स्पेससूट के अंतरिक्ष में चला जाए तो:
इसी कारण अंतरिक्ष यात्रियों के स्पेससूट में ऑक्सीजन की विशेष आपूर्ति होती है।
अंतरिक्ष में दबाव बहुत कम होता है। पृथ्वी पर वायुमंडलीय दबाव हमारे शरीर के तरल पदार्थों को स्थिर बनाए रखता है।
लेकिन अंतरिक्ष में:
इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में Ebullism कहा जाता है।
हालाँकि त्वचा शरीर को पूरी तरह फटने से बचा सकती है, लेकिन यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है।
पृथ्वी का वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र हमें खतरनाक विकिरणों से बचाते हैं। लेकिन अंतरिक्ष में यह सुरक्षा मौजूद नहीं होती।
अंतरिक्ष में मौजूद होते हैं:
इन विकिरणों के कारण:
इसी कारण अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष सुरक्षा उपकरण और ढाल (radiation shielding) का उपयोग किया जाता है।
हालाँकि Vacuum अंतरिक्ष की एक प्राकृतिक स्थिति है, लेकिन मानव ने इसका उपयोग कई वैज्ञानिक और औद्योगिक क्षेत्रों में भी करना शुरू कर दिया है।
Vacuum तकनीक आधुनिक विज्ञान और उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Vacuum का सबसे बड़ा उपयोग अंतरिक्ष तकनीक में होता है।
अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों को Vacuum वातावरण में कार्य करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
उदाहरण:
Vacuum की स्थिति को समझे बिना अंतरिक्ष यान का निर्माण संभव नहीं है।
Vacuum का उपयोग कई वैज्ञानिक प्रयोगों में किया जाता है, विशेष रूप से भौतिकी के क्षेत्र में।
कुछ प्रमुख उदाहरण:
Vacuum प्रयोगशालाओं में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजें हुई हैं।
Vacuum का उपयोग आधुनिक उद्योगों में भी व्यापक रूप से किया जाता है।
कुछ प्रमुख उदाहरण:
माइक्रोचिप और प्रोसेसर बनाने के लिए अत्यंत स्वच्छ और नियंत्रित वातावरण की आवश्यकता होती है, जिसके लिए Vacuum chambers का उपयोग किया जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में Vacuum deposition तकनीक का उपयोग किया जाता है।
Vacuum coating का उपयोग कई उत्पादों पर पतली धातु की परत चढ़ाने के लिए किया जाता है।
उदाहरण:
अंतरिक्ष को उसके स्थान और संरचना के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।
दो प्रमुख प्रकार हैं:
Interstellar Space वह क्षेत्र होता है जो किसी आकाशगंगा के अंदर तारों के बीच मौजूद होता है।
यह क्षेत्र पूरी तरह खाली नहीं होता।
इसमें मौजूद होते हैं:
यहीं पर कई बार Nebula बनते हैं और नए तारे जन्म लेते हैं।
Intergalactic Space वह क्षेत्र होता है जो दो आकाशगंगाओं के बीच मौजूद होता है।
यह ब्रह्मांड का सबसे खाली क्षेत्र माना जाता है।
यहाँ पदार्थ की मात्रा अत्यंत कम होती है और अक्सर केवल कुछ हाइड्रोजन परमाणु ही पाए जाते हैं।
इसलिए Intergalactic Space को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा Vacuum क्षेत्र माना जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार ब्रह्मांड का अधिकांश हिस्सा लगभग खाली है।
अनुमान के अनुसार:
ब्रह्मांड का लगभग 99.999999% हिस्सा Vacuum है।
इसका अर्थ यह है कि ब्रह्मांड में मौजूद पदार्थ केवल छोटे-छोटे क्षेत्रों में केंद्रित है।
उदाहरण के लिए:
ये सभी ब्रह्मांड के विशाल खाली क्षेत्र के भीतर छोटे-छोटे द्वीपों की तरह मौजूद हैं।
Space और Vacuum की अवधारणा को समझना आधुनिक विज्ञान और तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंतरिक्ष मिशनों के लिए रॉकेट और अंतरिक्ष यानों को Vacuum वातावरण में काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
यदि वैज्ञानिक Vacuum की प्रकृति को न समझें, तो अंतरिक्ष यात्रा संभव नहीं होगी।
आज हमारी कई तकनीकें satellites पर निर्भर करती हैं।
उदाहरण:
ये सभी तकनीकें अंतरिक्ष में काम करने वाले satellites पर आधारित हैं।
Vacuum physics कई वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसका उपयोग होता है:
Vacuum की समझ ने आधुनिक विज्ञान को नई दिशा दी है।
अंतरिक्ष एक अत्यंत कठोर और अलग वातावरण है जहाँ मानव शरीर बिना सुरक्षा के जीवित नहीं रह सकता। वहाँ ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक विकिरण और बहुत कम दबाव जैसे खतरनाक कारक मौजूद होते हैं।
फिर भी मानव ने Vacuum की प्रकृति को समझकर कई वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियाँ हासिल की हैं।
आज:
सभी Vacuum विज्ञान पर आधारित हैं।
इस प्रकार Space और Vacuum को समझना न केवल ब्रह्मांड को समझने के लिए आवश्यक है, बल्कि आधुनिक तकनीक और भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।